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“अभिनेता सैफ अली खान पर हुआ आक्रमण -कुछ भी स्पष्ट नहीं”

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-जगमोहन सिंह बरहोक की कलम से

अभिनेता सैफ अली खान पर हुए आक्रमण को कई दिन हो चुके हैं लेकिन पुलिस असली मुजरिम को पकड़ नहीं सकी। पुलिस ने जिन दो लोगों को ‘शक’ के बिनाह पर पकड़ा है उन्हें सूत्रों के मुताबिक छोड़ दिया गया है. उल्लेखनीय है की सबसे पहले यही साबित नहीं हो पाया की ‘तताकथित चोर’ कैसे ईमारत में घुस पाया। दूसरा- यह कहानी असली है या बुनी गयी है?. फिल्मों में सस्पेंस देखना या दिखाना अलग बात है. हकीकत में वह सब नहीं होता। इस बात की यह केस पुष्टि करता है. क्या वास्तव में कोई चोर ‘था’ भी या नहीं ?यह पहला सवाल है। दूसरा वह ब्लडिंग में कैसे घुस गया और अगर घरवालों ने चोर को कमरे में बंद कर दिया था तो फिर भाग कैसे गया? वास्तव में अगर सीढ़ियों पर दिखाई देने वाला ही ‘चोर’ था तो उसने भागते समय चेहरे को ‘ढका’ क्यों नहीं था. कहीं ऐसा तो नहीं की कहानी बुनी गयी हो एवं किसी ‘बाहरी आदमी’ का इससे कोई सम्बन्ध ही न हो। ‘चाकू’ घर का बताया गया है इसका मतलब है चोर साथ नहीं लाया था तो फिर ‘क्या’ करने आया था। दूसरी बात -चोर आया यह भी सिद्ध नहीं हो पा रहा. अगर रीढ़ की हड्डी में चाकू घुसा या मारा गया था तो ‘दो बच्चे’ सैफ़ को लेकर थ्री व्हीलर पर.रात 3 बजे हॉस्पिटल क्यों गये थे क्या आस पास कोई ऐसा नहीं था जिसके पास ‘मोटर कार’ हो या मदद मांगी जा सके.या मांगना ही नहीं चाहते थे. इनमें से किसी भी सवाल का उत्तर अभी तक नहीं मिला है ‘सस्पेंस फिल्मों’ में कहानी के अनुसार चीज़ें घटित होती हैं लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं होता। अक्सर सस्पेंस फिल्मों में भी कहानी का अंत ‘गोलमोल’ कर दिया जाता है.सूत्रों के अनुसार जाँच जारी है।

Jagmohan Singh Barhok

Leading Film , Fashion ,Sports & Crime Journalist Up North. Active Since 1971.Retired Bank Officer. Contributed more than 7000 articles worldwide in English, Hindi & Punjabi languages on various topics of interesting & informative nature including people, places, cultures, religions & monuments. Ardent Music lover.

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